Archive for September, 2009

चिडियाघर में रंग-बिरंगी चिडिया

यह बात मेरी समझ से परे है की जू को चिडियाघर क्यों कहा जाता है जबकि यहाँ सिर्फ चिडिया नही होती जैसा कि मैंने पिछले चिट्ठों में बताया.

हैदराबाद के जू के स्थलचर, जलचर और खूंखार जानवरों की तस्वीरें दिखाई, आज देखते है नभचर यानी उड़ने वाले यानी पंछियों की तस्वीरें -

पिंजरे में डालियों पर चहचहाती रंग-बिरंगी चिडियाएं, तोता मैना, उल्लू और भी कुछ कम जाने-पहचाने नभचर -

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रेंगने वाले जीवों के लिए एक गुफा सा गलियारा है जिसमें जीवों जैसे सांप, गिलहरी की प्रक्रृति के अनुसार वातावरण बना कर उन जीवों को रखा गया, देखिए तस्वीरें -

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और यह देखिए मोर-मोरनी जो चुपचाप है. मोर नाच नही रहा उसके पीछे फैले पंख देख सकते है -

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अगले चिट्ठे में जू की सामान्य जानकारी...

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जू में सफारी पार्क

हैदराबाद के जू में सफारी पार्क के लिए 25 रूपए का टिकट है. एक गाडी में 30 सीटे होती है. कम से कम 20 लोग हो तो गाडी चलाई जाती है.

उस समय लगभग 40 लोग थे इसीलिए दो गाडिया चल पडी. दरवाजे सुरक्षित रूप से खुले और गाडिया अन्दर पहुँची.

सबसे पहले गाडी रुकी तो दाहिनी ओर से सिंह आया और गाडी के पास मुंह फेर कर बैठ गया -

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फिर गाडी चल पडी. कुछ दूर जाकर रुकी तो बाई ओर से शेर आकर सामने खडा हो गया -

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फिर लौट कर जाने लगा -

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फिर गाडी चल पडी. कुछ दूर जाकर रुकी तो बाई और से ओर भालू आया और ड्राइवर के पास खडा होकर जाली में से उंगलिया डालने लगा फिर लगा जैसे मुंह चिढा रहा हो -

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वातावरण ऐसा मानो जंगल से गाडी गुजर रही हो. बहुत बढिया अनुभव...

अगले चिट्ठे में देखेंगे कि चिडियाघर में चिडिया भी है....

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जू की कुछ और तस्वीरें

हैदराबाद के जू की कुछ और तस्वीरें प्रस्तुत है -

देखिए पानी में पड़े मस्त गेंडे महाराज -

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पानी के बाहर सुस्ताते मगरमच्छ -

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और यह नील गाय -

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अगले चिट्ठे में सफारी पार्क...

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