यह बात मेरी समझ से परे है की जू को चिडियाघर क्यों कहा जाता है जबकि यहाँ सिर्फ चिडिया नही होती जैसा कि मैंने पिछले चिट्ठों में बताया.
हैदराबाद के जू के स्थलचर, जलचर और खूंखार जानवरों की तस्वीरें दिखाई, आज देखते है नभचर यानी उड़ने वाले यानी पंछियों की तस्वीरें -
पिंजरे में डालियों पर चहचहाती रंग-बिरंगी चिडियाएं, तोता मैना, उल्लू और भी कुछ कम जाने-पहचाने नभचर -





रेंगने वाले जीवों के लिए एक गुफा सा गलियारा है जिसमें जीवों जैसे सांप, गिलहरी की प्रक्रृति के अनुसार वातावरण बना कर उन जीवों को रखा गया, देखिए तस्वीरें -

और यह देखिए मोर-मोरनी जो चुपचाप है. मोर नाच नही रहा उसके पीछे फैले पंख देख सकते है -


अगले चिट्ठे में जू की सामान्य जानकारी...








