अमरावती – एक छोटा सा दर्शनीय और महत्वपूर्ण गाँव

हमारे देश में बहुत कम स्थान ऐसे है जो पौराणिक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। एक ऐसा ही स्थल है - अमरावती

ऐसे महत्वपूर्ण स्थल को देखने की कामना लिए पिछले दिनों हम अमरावती गए।

अमरावती का नाम लेते ही दिमाग़ में आता है महाराष्ट्र। देश भर में लोकप्रिय है महाराष्ट्र का अमरावती। यहाँ तक कि सालों पहले से लेकर आज तक सिलोन से लेकर विविध भारती तक कई-कई श्रोता अमरावती से फ़िल्मी गानों की फ़रमाइश करते है। हम आपको बता दे कि एक और अमरावती है जो आन्ध्र प्रदेश में है।

आन्ध्र प्रदेश के गुण्टूर ज़िले का एक छोटा सा गाँव है अमरावती। इतना छोटा कि पूरे गाँव को आप पैदल घूम कर देख सकते है। यह छोटा सा गाँव पूरा का पूरा महत्वपूर्ण है इसीलिए दर्शनीय है और इसीलिए छोटा सा गाँव होने के बावजूद भी यहाँ सुविधाएँ है। राज्य सरकार के पर्यटन विभाग का विश्राम गृह है। ठहरने के लिए लाँज और होटल है जहाँ वातानुकूलित (एयर कंडीशन) कमरे भी है। एटीएम की सुविधा है। डाकघर और टेलीफोन केन्द्र भी है।

हैदराबाद से अमरावती तक की यात्रा 8 घण्टे की है पर सीधे बस और रेल सेवा नहीं है। हैदराबाद से गुण्टूर या विजयवाड़ा जाकर वहाँ से बस से अमरावती पहुँचा जाता है। हैदराबाद से गुण्टूर और विजयवाड़ा जाने के लिए और इन दोनों स्थानों से अमरावती जाने के लिए बहुत बसें है। हैदराबाद से अमरावती जाने वालों की संख़्या कम होने से सीधे बस सेवा नहीं है पर कुछ टूर पैकेज में सीधे बसें है।

हमने गुण्टूर से जाने का निर्णय लिया और गुण्टूर तक रेल यात्रा की। दोपहर 12 बजे नामपल्ली स्टेशन से रेलगाड़ी रवाना हुई और शाम 5:30 बजे हम गुण्टूर पहुँचे। रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही अमरावती जाने के लिए बसें मिल जाती है। 15 मिनट के भीतर हमें भी बस मिल गई।

एक तो शाम का समय और ऊपर से मानसून दस्तक दे चुका है तो स्वाभाविक है कि मौसम बहुत सुहावना था। बस जैसे ही शहर से बाहर निकली बूँदा-बाँदी शुरू हो गई। दोनों ओर बारी-बारी से खेत और पहाड़ नज़र आ रहे थे जिनका नज़ारा शाम के झुटपुटे और रिमझिम में बहुत आकर्षक था। फिर थोड़ी देर के लिए बहुत तेज़ बारिश हुई। इस तरह डेढ घण्टे का सफ़र पूरा कर अमरावती पहुँचने तक अँधेरा हो चुका था और बत्ती गुल हो चुकी थी।

ख़ैर… जहाँ हम बस से उतरे वहीं हमें ठहरने की जगह मिल गई। बताया गया कि बारिश बहुत हुई थी जिससे करंट नहीं है और पता नहीं कब आए, यह तो आम समस्या है। हमने तरोताज़ा होकर कुछ देर आराम किया फिर बत्ती भी जल उठी। हमने सोचा खाना खाकर कुछ देर हवा में बाहर टहला जाए।

हम आपको बता दे कि तीन साल पहले यह गाँव अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर था। जनवरी 2006 में यहाँ बौद्ध धर्म के अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसकी अध्यक्षता स्वयं दलाईलामा ने की थी।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बौद्ध काल के कारण अमरावती का महत्व है बल्कि इसका पौराणिक महत्व भी है जो श्रावण मास में और बढ जाता है। देश के 5 प्रमुख स्वयंभू शिवलिंगों में से एक यहाँ है। यह मन्दिर अमरेश्वर मन्दिर कहलाता है जो कृष्णा नदी के किनारे बसा है।

बस मन्दिर के पास ही छोड़ती है क्योंकि यह गाँव का अंतिम छोर है और हम भी यही ठहरे थे। रात में हमने देखा मन्दिर के बाहरी परिसर में सन्नाटा पसरा था। हमारी आशा के विपरीत रात की आरती का हल्ला-गुल्ला नहीं था। वैसे भी यहाँ पर्यटक कम ही आते है इसीलिए हमने घूमने का कार्यक्रम अगले दिन के लिए रखा।

अगले दिन हमने पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों को देखने का आनन्द उठाया जिन्हें हम आपसे बाँटना चाहेंगे। एक के बाद एक इनकी जानकारी हम देगें अगले चिट्ठों में…

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7s टिप्पणियाँ »

  1. मै भी तिरूपती से लौटते समय नक्शे पर अमरावती नाम देख कर चौंक गया था्।मूलतः मै अमरावती ज़िले का ही रहने वाला हूं इसलिये।उस समय उस अमरावती के दर्शन की कोशिश की थी मगर उस समय मौसम बिगड गया था और मज़बूरी मे वापस लौटना पड़ा थ उसके बारे मे सिर्फ़ सुनकर्।

  2. लाल और बवाल said

    ठहरने के लिए लाँज और होटल है जहाँ वातानुकूलित (एयर कंडीशन) कमरे भी है।
    ये होटल वोटल किसी काम के नहीं जी, रात बिरात कभी यहाँ पहुँच जाइए तो ससुरा एक कमरा तक नहीं मिलता पूरे अमरावती में । आगे मुर्तझापुर में जाकर रात गुज़ारनी पड़ जाती है। समझे आप। बड़ी आई आपकी अमरावती। हा हा।
    नहीं नहीं जी हम तो ऐसे ही कह रहे थे जी, बड़ी अच्छी है अमरावती नगरी अगर दिन में लंच भर करके आगे नागपूर या अकोला निकल जाना हो तो।

  3. very good write it has a veery good information

  4. kripya naye naye jaankari ke liye muje mail kare

  5. निखील जोशी said

    पौराणिक तथा ऐतिहासीक महत्व तथा महाराष्ट्रका एक ऍसा जीला है जहाँ वनसंपत्ती,वन्यजीव एवमं दर्शनिय स्थल भी है।

  6. anug said

    निखिल जी यह अमरावती जिला महाराष्ट्र का नही आंध्र प्रदेश का हैं।

    चिट्ठे पर आने का शुक्रिया।

  7. Anonymous said

    अमरावती

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