हैदराबादी भाषा से वास्तव में जनता परिचित हुई हिन्दी फ़िल्मों से और यह परिचय करवाया महमूद ने।
वास्तव में हैदराबाद में एक भाषा-भाषी लोग नहीं है। यहाँ के मुसलमानों की भाषा उर्दू है, कायस्थ और खत्रियों की हिन्दी है, मरेठों की भाषा मराठी है, राजस्थानी लोग भोजपुरी और मारवाड़ी बोली बोलते है, तेलंगे तेलुगु भाषा बोलते है पर यह तेलुगु आन्ध्र प्रदेश की तेलुगु से अलग है। आन्ध्र प्रदेश की तेलुगु साहित्यिक है जबकि इन तेलंगाना वासी तेलंगों की तेलुगु एक बोली की तरह है। जनजाती पारदनों और लम्बाड़ियों की अपनी-अपनी बोलियाँ है पर सबकी आम भाषा हैदराबादी उर्दू है।
कुछ हैदराबादी शब्द बहुत अधिक जाने-पहचाने हो गए है जैसे हाँ के लिए हौ कहना और यह हौ में भी ह के साथ औ की मात्रा का सामान्य उच्चारण नहीं है, सही उच्चारण है - hauo और नहीं के लिए नक्को कहना, वास्तव में नक्को मराठी का शब्द है और पता नहीं यह कैसे हैदराबादी उर्दू में आ गया है, यह शब्द मरेठों के हैदराबाद रियासत में बसने के पहले से है।
हैदराबादी उर्दू को दक्खिनी उर्दू कहा जाता है क्योंकि यह लखनऊ की उर्दू से अलग है। लखनऊ की उर्दू साहित्यिक है जबकि हैदराबाद की उर्दू वास्तव में भाषा से अधिक एक बोली की तरह है।
यहाँ मैं कुछ ऐसे शब्द दे रही हूँ जिनका दैनिक उपयोग होता है -
हाँ - हौ
नहीं - नक्को (मना करने के लिए)
नहीं - नइ
नहीं नहीं - नक्कोइच्च नक्को
क्यों - कईकू
यहीं है - यईच्च है
वहीं है - वईच्च है
इधर ही - इदरिच्च
उधर ही - उदरिच्च
पड़ता है -पड़तईच्च
ऐसा - अईसा
ऐसा ही - अइसइच्च
वैसा - वईसा
वैसा ही - वइसइच्च
कैसा - कईसा
कैसा ही है - कइसाकीच्च
वो - उनो
ये - इनो
मुझे - मेरेकू
तुझे - तेरेकू
अपने को - अपनकू
तुम लोग - तुमे लोगा
बातें - बातां
बहुत - भोत
कच्चा है - कच्चइच है
पका ही नहीं - पकईच्च नइ
कुछ और शब्द भी है और शब्दों के अलावा कुछ वाक्य भी है जिन्हें हम अगले किसी चिट्ठे में बताएगें…
loksangharsha said
good
vivek said
अई ओ अम्मा मेर कु उने भाडखाऊ चिंदीचोरां हैदराबादी नवाबां और अंग्रेजां फिलम की यादां आ गी. हउ रे क्याइच्च मस्त फिलमां है दोनों… माँ की किरकिरी.
PN Subramanian said
बड़ी दिलचस्प जानकारी. आभार.
मनीष said
पहली बार हैदराबादी लिंगो पर ध्यान गया था फिल्म देशप्रेमी में अमिताभ के चरित्र के द्वारा। वेसे एक गीत भी था इस फिल्म का जो अमिताभ व हेमा जी पर फिल्माया गया था
बाताँ नहीं करते हम हैदराबादी
हाथों में तेरे जो मेंहदी ना लगा दी
तो नाम नहीं लेंगे अपने वतन का
तंदाना….ताने धिन तंदाना
आपकी इस पोस्ट ने इस गीत की याद दिला दी. वैसे तंदाना भी क्या कोई हैदराबादी शब्द है?
annpurna said
हैदराबाद में होने वाले लोकोत्सव में मस्ती में नाचने को तंदाना कहते है। वैसे इस शब्द का प्रयोग मुहावरे जैसा भी होता है जैसे बहुत जोर-शोर से कोई किसी मुद्दे पर बात कह रहा हो तो कहते है वो तो तंदाना कर रहा है।