गायत्री माँ और नरसिंह भगवान की मूर्ति के पास है त्रिशक्ति - गजलक्ष्मी, हंसवाहिनी और शेरांवाली
अष्टलक्ष्मी - धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, वर लक्ष्मी, सन्तान लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी और ऐश्वर्य लक्ष्मी में से यहाँ लक्ष्मी जी अपने गज ल्क्ष्मी रूप में है जहाँ दोनों ओर ऐरावत फूलमाला लिए उनके स्वागत में है और कमल आसन पर कलश से स्वर्ण मुद्राएँ गिर रही है।
एक ओर है वीणावादिनी सरस्वती जो हाथों में वीणा लिए हंस पर विराजमान है और दूसरी ओर है शेर की सवारी कर रही माँ दुर्गा -
देख कर ऐसा लग रहा था कि शायद बाद में इसे ही मुख्य मन्दिर का प्रवेश द्वार बनाया जाएगा -
यहाँ तेलुगु में लिखा भी है गुड़ी दारि। तेलुगु में गुड़ी का अर्थ है मन्दिर और मार्ग को दारि कहते है।
यहाँ से आगे बने मन्दिर के कलश तक दीवार पर कतार में शिवलिंग को हार चढाते हाथियों की आकृतियाँ है। कलश के पास तेलुगु में बड़े अक्षरों में मन्दिर का नाम लिखा है - सुरेन्द्रपुरी पंचमुखी
इसी के आगे अंत में शेषनाग पर ब्रह्मा विष्णु महेश की मूर्तियाँ है जो इस समय मन्दिर में भीतर जाने का प्रवेश द्वार है जिसका विवरण अगले चिट्ठे में…


