सुरेन्द्रपुरी में प्रवेश द्वार पर सुरेन्द्र देव की विशाल मूर्ति के पीछे थोड़ी ही दूरी पर है एक विशाल मूर्ति जो पंचमुखी हनुमान जी की है -
यही मूर्ति पीछे से शिवजी के पंचेश्वर रूप की है -
इस चित्र से यहाँ शेष रह गए छोटे पहाड़ भी देखे जा सकते है।
आगे बढ कर हमने देखा दाहिनी ओर (अपनी दाहिनी ओर तथा मन्दिर की बाईं ओर) निर्माण कार्य चल रहा है। सबसे दाहिने मन्दिर के सफ़ेद कलश है जो हनुमान जी के चित्र में देखे जा सकते है। यहाँ हिमालय पर्वत पर शिवजी विराजमान है पर मन्दिर पूरा बना नहीं है।
इसके बाईं ओर भी एक मन्दिर का काम चालू है पर अभी स्पष्ट नहीं है कि कौन सा मन्दिर है। इसके बाईं ओर है विशाल मूर्ति शंख, चक्र, पद्म, गदाधारी पंचमुखी गायत्री माँ की -
जिसके पास ही है नरसिंह भगवान की मूर्ति जो बहुत ही आकर्षक है जैसा कि आप इस चित्र में देख रहे है -
नरसिंह भगवान की जीभ बाहर निकली है जिसके दोनों ओर है नुकीले दाँत। जीभ के भीतरी छोर पर यानि मुख के अन्दर भी एक मूर्ति है जो शायद गणेश जी की है, सामने से तो ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था और पीछे निर्माण कार्य चलने से जा नहीं पाए।
हम बाईं ओर आगे बढते गए और देखते गए जिसकी जानकारी अगले चिट्ठे में…




mehek said
hanuman shiv ki do tarfa mrti aur sabse khubsurat narsinh dev ki murat wah ue sthal bahut sundar hai.
समीर लाल said
सुबह सुबह बहुत बढ़िया दर्शन करवा दिये. बहुत आभार.
Annapurna said
धन्यवाद महक जी समीर जी !