आन्ध्र प्रदेश के प्रमुख मन्दिरों में से एक है - यादगिरी गुट्टा
तेलुगु भाषा में पहाड़ी को गुट्टा कहते है। विष्णु के नरसिंह अवतार को दक्षिण में यादगिरी स्वामी कहते है। इस तरह यादगिरी गुट्टा का अर्थ हुआ पहाड़ी पर नरसिंह अवतार यानि पहाड़ी पर स्थित नरसिंह अवतार का मन्दिर जिसे लक्ष्मीनारायणा स्वामी का मन्दिर कहा जाता है और यह स्थान यादगिरी गुट्टा कहलाता है।
आन्ध्र प्रदेश के नलगोण्डा ज़िला में स्थित यादगिरी गुट्टा अब हैदराबाद से दो घण्टे की दूरी पर है। पहले रास्ते ठीक नहीं थे इसीलिए चार घण्टे से भी अधिक समय लग जाता था। पिछले शनिवार हम सुबह-सवेरे घर से निकले और दो घण्टे में पहुँच गए यादगिरी गुट्टा -
परिसर में प्रवेश करते ही बड़ा बाज़ार है। दोनों ओर पूजा-पाठ से संबंधित सभी सामग्री है। बाईं ओर होटल और लाँज भी है। सामने हरे-भरे वृक्षों में से जो पीला गुम्बद नज़र आ रहा है वो मन्दिर का प्रवेश द्वार है जहाँ से चार सौ से भी कुछ अधिक सीढियाँ चढ कर मन्दिर जाया जाता है।
इस प्रवेश द्वार के ऊपर पहाड़ी नज़र आ रही है जिस पर रंगीन तीन चिन्ह गढे गए है - बीच में त्रिशूल दाईं ओर शंख बाईं ओर सुदर्शन चक्र जिसके ऊपर मन्दिर के पीले कलश नज़र आ रहे है जिसमें से बाईं ओर का सबसे ऊपर का कलश नारयणा स्वामी मन्दिर का है।
बहुत पहले जब हम यहाँ आए थे तो सभी श्रृद्धालु इन चार सौ सीढियाँ चढ कर ही ऊपर जाते थे। इन सीढियों पर बन्दर बहुत थे जिनकी उछलकूद से बच्चे तो ख़ुश होते है पर बड़े बहुत ही सँभल चढा उतरा करते थे। यादगिरी गुट्टा के पूरे क्षेत्र में बहुत बन्दर थे जो धीरे-धीरे कम होते गए और अब हमें केवल एक ही बन्दर नज़र आया।
सीढियों के बाईं ओर से जाने वाली सड़क से गाड़ी से ऊपर जाया जाता है। अब तो यहाँ गाड़ियों की कतार नज़र आई और सीढियों पर बहुत ही कम लोग नज़र आए। पहले केवल मन्दिर की ही एक बस थी जो श्रृद्धालुओं को ऊपर तक ले जाती थी बाद में बस बन्द हो गई। लोग निजि वाहनों से ऊपर जाने लगे और साथ ही टैम्पों, आँटो शुरू हुए।
और हाँ तांगा भी था जिस पर लोग शौकिया जाते थे। अब ऊपर जाने के लिए तांगे नहीं है। हम भी निजि गाड़ी से सड़क से ऊपर गए और सबसे पहले देखी यह कमान -
बीचों-बीच विष्णु भगवान नरसिंह अवतार में है और उनकी बाईं जंघा पर विराजमान है लक्ष्मी -
आगे बढने पर धर्मशाला है जिसमें श्रृद्धालुओं के ठहरने के लिए बहुत से कमरे है। यहाँ राज्य सरकार का गेस्ट हाउज़ भी है। यह परिसर भी बड़ा है। यहाँ भी बाज़ार है।
मन्दिर की चर्चा अगले चिट्ठे में…



mehek said
narsiha mandir pehli baar dekha,nice description,tanga
:),fav sawari,ab to mumbai ke chaupati par baithana hota hai us mein
;).sundar
समीर लाल said
अच्छा वर्णन-चित्र दर्शन भी उम्दा है. आभार.
Annapurna said
धन्यवाद महक जी समीर जी !