सुरेन्द्रपुरी मन्दिर परिसर में बाएँ कोने में मन्दिर का प्रवेश द्वार है - शेषनाग पर ब्रह्मा विष्णु महेश की मूर्तियाँ
प्रवेश द्वार से भीतर रंग-बिरंगे कलश नज़र आ रहे है, ये है नौ ग्रह के नौ मन्दिर -
एक बड़े चबूतरे पर नौ छोटे मन्दिर है। हर ग्रह का एक मन्दिर यानि नौ ग्रह के नौ मन्दिर। हर मन्दिर में एक ग्रह की मूर्ति है। मूर्तियों की स्थापना अलग-अलग दिशाओं में ठीक वैसे ही है जैसे आमतौर पर मन्दिरों में होती है। यहाँ हर ग्रह की अलग-अलग परिक्रमा भी की जा सकती है और नौ ग्रह की एक साथ भी परिक्रमा की जा सकती है जैसा कि आमतौर पर करते है।
जिस दिशा में मूर्ति स्थापित है उसी ओर किवाड़ है। इस तरह इस बड़े चबूतरे पर इन मन्दिरों के बीच से घूमते हुए एक-एक मन्दिर में एक-एक ग्रह के दर्शन करने पड़ते है। वैसे सभी किवाड़ बन्द थे पर किवाड़ का ऊपरी आधा भाग जाली से बना होने से मूर्तियाँ हम देख पाए। लगता है दर्शनों के लिए अभी इसे अधिकृत तौर पर खोला नहीं गया है क्योंकि मन्दिर इस समय खुला था।
ग्रहों के अनुसार मन्दिरों के रंग है जैसे शनि महाराज की मूर्ति जिस मन्दिर में है उस मन्दिर का रंग गहरा गुलाबी है। राहु ग्रह का मन्दिर स्लेटी रंग का है। चन्द्र ग्रह के मन्दिर सफ़ेद है।
मैनें ऐसी व्यवस्था पहली बार देखी। आमतौर पर मन्दिर में सभी देवी-देवताओं के दर्शन करने के बाद नौ ग्रह के दर्शन किए जाते है और यह माना जाता है कि नौ ग्रह के दर्शन के बाद फिर मन्दिर में देवी-देवता के दर्शन नहीं किए जाने चाहिए। इसीलिए मन्दिरों में अक्सर बाहरी ओर एक चबूतरे पर ही नौ ग्रह की मूर्तियाँ स्थापित की जाती है जिनके दर्शन कर परिक्रमा करने के बाद सीधे बाहर जा सकें।
यहाँ प्रवेश द्वार से भीतर जाते ही नौ ग्रह है, लगता है यह प्रवेश द्वार अस्थायी है और बाद में इसे बाहर निकलने का द्वार रख कर मन्दिर का प्रवेश द्वार बीच में रखेगें जैसा कि मैनें पिछले चिट्ठे में बताया।
प्रवेश द्वार से भीतर जाते ही दाहिनी ओर यानि नौ ग्रह मन्दिर के ठीक सामने दो ही दुकानें थी जहाँ पूजापा (पूजा की सामग्री) बिक रही थी। कोई बाज़ार यहाँ नज़र नहीं आया।
नौ ग्रह मन्दिर के बाद जैसा कि चित्र में एक कमान सी नज़र आ रही है, यहाँ विराजमान है सूर्यदेवता, पूरी जानकारी अगले चिट्ठे में…








