संगम से हम लौट कर आए। जहाँ सड़क समाप्त हुई वहीं है टीपू सुल्तान का मकबरा (समाधि)
यहाँ तीन-चार घोड़े खड़े थे और घोड़े वाले पर्यटकों से घुड़सवारी के लिए कह रहे थे। शायद कुछ दूर तक घुड़सवारी कराई जाती है, शायद बच्चों को ही, वैसे जितनी देर हम बाहर थे हमने कोई घुड़सवारी नहीं देखी।
तीन-चार दुकानें सजी थी जहाँ खिलौने, गुब्बारे, टोपियाँ, चूड़ियाँ आदि बिक रहे थे। एक दुकान पर समाधि पर चढाई जाने वाली चादरें बिक रही थी।
हम भीतर पहुँचे। ऊँचे-ऊंचे पेड़ जिनमें से सामने ही कैरियों से लदे आम के पेड़ थे। दोनों ओर हरियाली भी थी, बाग़ की तरह संवारा भी गया था पर सामने की ओर मकबरे तक जाने वाला सीधा रास्ता मिट्टी का ही था।
भीतर बीच के कक्ष में तीन समाधियाँ है - बाईं ओर टीपू सुल्तान की माँ शायद आमेना या अमीना बेगम बीच में पिता हैदर अली और दाहिनी ओर टीपू सुल्तान। तीनों समाधियों पर श्रृद्धालुओं द्वारा चढाई गई रंग-बिरंगी चादरें थी। कक्ष में नीम अँधेरा था और शान्त वातावरण। देखभाल करने वाले दो-तीन व्यक्ति वहाँ मौजूद थे।
कक्ष से बाहर पीछे की ओर टीपू सुल्तान के परिवार वालों की समाधियाँ थी। हर समाधि पर नाम और रिश्ता लिखा था। वहाँ से हम नीचे आँगन में उतर आए।
आँगन में ख़ास सिपहसलारों और मंत्रियों की समाधियाँ थी जो बहुत ही व्यवस्थित क्रम में थी। दाहिनी ओर बड़ी समाधि सेनापति की थी। प्रमुख मंत्रियों की समाधियाँ थी और बाईं ओर क्रम से सिपहसलारों की। हर समाधि पर नाम, पदनाम और वो कारनामा लिखा था जिससे उन्हें वीरगति मिली थी।
मुझे खेद है कि एक भी नाम याद नहीं आ रहा। तुर्की नाम वैसे भी याद रखना कठिन ही होता है।

mehhekk said
aisa laga mano pratyaksha roop mein tipu sultan ki samadhi dekh aaye hum,tipu raja se khaas lagav hai hame,itihaas mein bas unka hi chapter dhyan se padhte thay.he was realy a very brave sultan,amen.
mamta said
आपके साथ हम भी घूम लिए।
समीर लाल said
अच्छा लगा यात्रा वृतांत. लिखते रहें.
p k kush ' tanha' said
sajiv chitran ke liye aapka shukriya. tasweer bhi sunder ban padii hai.
Annapurna said
धन्यवाद महक जी, ममता जी, समीर जी और तन्हा जी !
Anonymous said
thank u
mahank Ji mughey isi ki janakari Chahiye thi