टीपू सुल्तान का म्यूज़ियम देखने के बाद हम आगे बढे टीपू सुल्तान का मकबरा (समाधि) देखने।
जैसे ही हम वहाँ पहुँचे हमने देखा बाईं ओर जाने के लिए एक सड़क वहीं से शुरू हुई और वहीं लगे बोर्ड पर लिखा था - संगम।
हमने सोचा पहले संगम ही जाएगें और पहले संहम जाना ही ठीक है क्योंकि मकबरे से शुरू टीपू सुल्तान का क्षेत्र दाहिनी ओर बढता जाता है और यही सड़क आगे मैसूर की ओर जाती है इसीलिए हम आगे बढ गए बाईं सड़क पर संगम की ओर।
सड़क के अंतिम छोर पर है संगम - तीन नदियों का संगम - ये तीन नदियाँ है - कावेरी, हेमावती और लोकपावनी।
चित्र में आप देख सकते है बाएं दाएं और सामने तीन दिशाओं से आता पानी और संगम स्थल। पानी में शिवलिंग भी दिखाई दे रहे है। सामने एक साफ़ नज़र आ रहा है जिसके पीछे दूसरा है और दाहिनी ओर तीसरा है जो चित्र में आ नहीं पाया।
हिन्दु धर्म की आस्था का केन्द्र है यह संगम जहाँ अपने पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए पानी छोड़ा जाता है। यहाँ पितृकार्य भी संपन्न होते है। जब तक हम वहाँ थे तब तक ऐसा कोई कार्य हमने वहाँ नहीं देखा पर हाँ कुछ लोगों को पूर्वजों के लिए पानी छोड़ते अवश्य देखा।
दो-तीन नौकाएं भी दिखाई दी जिनमें लोग कुछ दूरी तक चक्कर लगा रहे थे। इक्का-दुक्का संगम में स्नान कर रहे थे और कुछ किनारे पर बैठे-बैठे ही संगम के पानी से हाथ-मुँह धो कर औपचारिकता पूरी कर रहे थे।
एक बात अच्छी लगी कि घाट अधिक गन्दा नहीं था कुछ साफ़ ही नज़र आया। घाट की सीढियों पर कुछ देर तक हम भी बैठे रहे।
घाट पर छोटा सा बाज़ार सजा था जहाँ दूर्वा के गट्ठर बिक रहे थे जो तर्पण के लिए अनिवार्य होता है। इसके अलावा नारियल पानी, गन्ने का रस, फल और छोटी-छोटी एक-दो दुकानों पर बिन्दी चूड़ी जैसी चीज़े बिक रही थी।
घाट पर लगे बोर्ड पर तीनों नदियों के नाम, उद्गम और घाट क्षेत्र आदि के बारे में सामान्य जानकारी कन्नड़ और अंग्रेज़ी भाषा में लिखी थी।
कुल मिला कर कर्नाटक में स्थित यह संगम अच्छा ही लगा।
यहाँ एक बात हम आपको बता दें कि पिछले कुछ चित्रों से चित्र पर तिथि में दिन और महीना तो ठीक आ रहा है पर वर्ष 2008 के बजाय 2006 आ रहा है। यह गलती कैमरे में सेल लगाते समय हुई और यह हम यात्रा की समाप्ति के बाद ही देख पाए।

mehhekk said
bahut ki rochak jankari sangam ki photo sundar hai.
Anonymous said
bahut hi aachi jankari hai
समीर लाल said
उम्दा जानकारी. आभार.
Annapurna said
धन्यवाद महक जी समीर जी !
बेनामी जी धन्यवाद ! अगर आप नाम से टिप्पणी करते तो अच्छा लगता।