नवरात्र में कुछ लोग केवल फलाहार लेते है। फलाहार में शामिल है फल और दूध। सबसे अच्छा फलाहार है - केला और दूध
दूध में इतने पौष्टिक तत्व होते है कि दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है। इसी तरह केले में भी इतने पौष्टिक तत्व होते है कि केले को भी संपूर्ण आहार माना जाता है। इसीलिए केले और दूध का मिश्रण स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
प्राकृतिक शक्कर केले और दूध दोनों में होती है इसीलिए केले का छिलका निकाल कर दूध में केले को मसल कर खाया जा सकता है, शक्कर या कुछ और मिलाने की आवश्यकता ही नहीं होती।
केले में नैसर्गिक या प्राकृतिक शक्कर अधिक होती है। इसीलिए मधुमेह (डायाबिटिस) के रोगियो को इससे दूर रखा जाता है।
इसमें खनिज लवण जैसे कैल्शियम, मैग्निशियम, पोटैशियम, फास्फोरस, ताँबा, लोहा बहुत होते है। कार्बोहाइड्रेड 22% प्रोटीन 2% वसा 1% विटामिन ए और बी 03% विटामिन सी 1% होते है।
दूध में प्रोटीन 3% वसा 4% कार्बोहाइड्रेड 5% विटामिन और लवण लगभग 1% होते है।
वैसे हिन्दु संस्कृति में मांगलिक कार्यों में दूध विशेषकर गाय का दूध और केला अनिवार्य होते है। केले के पत्ते और तने का उपयोग तोरण लगाने और मंडप बनाने में किया जाता है। भोग में भी केला रखा जाता है।
प्रसाद भी केले के पत्ते में ग्रहण किया जाता है। यहाँ तक कि भोजन भी केले के पत्ते में किया जाता है। इसीलिए व्रत में भी सबसे उत्तम फल केला माना जाता है।
सामान्य नाम केला है। यहाँ हैदराबाद में इसे मौज़ कहा जाता है। इसका कोई और नाम मुझे ज्ञात नहीं है। इसका वैज्ञानिक नाम मूसा पारादिसिआका लिनिअस है।