गीतों की पुरवाई में आज प्रस्तुत है पंडित नरेन्द्र शर्मा का गीत - ज्योति कलश छलके
दीपावली के माहौल में मुझे इससे अच्छा गीत और कोई नहीं सूझ रहा। हालांकि कई गीत ऐसे है जिनमें दीपक, आतिशबाजी, सजावट, पकवान की भीनी खुशबू है फिर भी इस गीत की बात ही कुछ और है।
अगर केवल सरसरी नज़र इस गीत पर डाली जाए तो शायद यह दीपावली के अनुकूल ना भी लगे। लेकिन पढते-पढते आप इसमें डूब अवश्य जाएगें और इस गीत को अगर आप लता मंगेशकर की आवाज़ में सुनेगें तो आपका मन अथाह गहराई में हिलोरे लेगा।
दिवाली के अवसर पर विविध भारती हो या आकाशवाणी के क्षेत्रीय केन्द्र कम से कम एक बार तो किसी न किसी समय यह गीत ज़रूर बजाते है। इस गीत को फ़िल्म भाभी की चूड़ियां में रखा गया। इस तरह वर्षों से यह फ़िल्मी गीत के रूप में दिलो-दिमाग़ पर छाया है। आनन्द लीजिए -
ज्योति कलश छलके
हुए गुलाबी लाल सुनहरे
रंग दल बादल के
ज्योति कलश छलके
घर आंगन वन उपवन उपवन
करती ज्योति अमृत के सींचन
मंगल घट ढल के
ज्योति कलश छलके
पात पात बिरवा हरियाला
धरती का मुख हुआ उजाला
सच सपने कल के
ज्योति कलश छलके
ऊषा ने आंचल फैलाया
फैली सुख की शीतल छाया
नीचे आंचल के
ज्योति कलश छलके
ज्योति यशोदा धरती मैय्या
नील गगन गोपाल कन्हैय्या
श्यामल छवि झलके
ज्योति कलश छलके
अम्बर कुमकुम कण बरसाए
फूल पंखुड़ियों पर मुस्काए
बिन्दु तुहिन जल के
ज्योति कलश छलके