Archive for August, 2007

मेरे भूले बिसरे गीत

प्रस्तुत है मेरे भूले बिसरे गीत । आं आं आं जी नहीं इन गीतों का विविध भारती के भूले बिसरे गीतों से कोई लेना-देना नहीं है । ये मेरे बचपन के गीत है।
जी हां, बचपन - जिन्हें आप सब ने जिया है। हम सभी बचपन में चाहे किसी भी स्कूल से पढे हो सांस्क्रतिक कार्यक्रमों से ज्ररूर जुड़े रहे। छोटे से गांव की पाठशाला में भी झंडा वन्दन ज़रूर होता है ऐसे में गाए जाने वाले गीत भी सांस्क्रतिक कार्यक्रम के वर्ग में रखे जा सकते है। मुद्दा ये कि हम सभी बचपन के गीतों से जुड़े है चाहे गाया हो या केवल दर्शक की तरह सुना हो। कुछ ऐसे ही गीत मैं यहां प्रस्तुत कर रही हूं जो आधे-अधूरे है।

पहला गीत माझी गीत है -

अब मचल उठा है दरिया
और बहने लगी है नदिया
उनचास पवन डोले
झंझा की बजे बंसुरिया
ओ नैय्या पार लगा दे
ओ रे ओ माझी पार लगा दे

दूसरा गीत शायद एक लोक गीत है -

ऊंची डगर मोरा गांव
ओ नदिया नीचे बहे

तीसरा गीत ऐसा है जिसकी प्रस्तुति में मुझे बहुत मज़ा आया था -

नन्ही नन्ही नारियां
भरने चली पानियां
झूम-झूम गाएंगें
हंसते हंसते जाएगें

यह गीत शायद किसी जाने-माने क्र्ष्ण भक्त कवि का है। बहुत बड़ी रचना है। अंतरों की संख्या भी मुझे याद नहीं। इस युगल गीत की केवल यही पंक्तियां याद है -

कहां चली ओ ब्रज की बाला
सिर पर लिए गगरिया
छेड़ करों न ओ नन्द्लाला
छोड़ो मोरी डगरिया

अगर कोई इन गीतों को पूरा कर पाए या कुछ और पंक्तियां जोड़ पाए या कवि के नाम बता पायें ठीक है। और हां अगर आपको भी कोई ऐसा ही गीत याद आ रहा हो तो हमसे बाटिएं।

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पुरवाई

सावन के इस मौसम में आइए बरखा रानी का स्वागत करें !

एक गीत प्रस्तुत है। यह गीत स्कूल - कालेज में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बहुत बार प्रस्तुत  किया गया, यहाँ तक कि पुरस्कार भी जीते पर पता नहीं चल पाया है कि यह गीत किसने लिखा है। किसी ने किसी को दिया, किसी ने किसी को और कई हाथों से होते हुए गीत अच्छा लगने लगा।

आप भी आनन्द लीजिए इस बरखा गीत का जिसमें पुरूष-स्त्री के एकल स्वर के साथ कोरस भी है -

कैसे छिपाऊं मन की बात रे (स्त्री)
कूके कोयल सारी-सारी रात रे
बिजली कड़के जियरा धड़के
बैरन बरखा कर गई घात रे

काली घटा घिर आई चहुं ओर (कोरस)
बूंद-बूंद बरसे चहुं ओर
बूंद-बूंद बरसो रे  बूंद-बूंद बरसो रे 
बूंद-बूंद बरसो रे  बूंद-बूंद बरसो रे 

मोरी गगरी खाली बैल प्यासे (स्त्री)
भर गगरी अब लाऊं कहां से
ए ए ए ए ए ए ओए

मोरा खेतन सूखो जाए (पुरुष)
ओ रामा खेतन सूखो जाए

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ (स्त्री)

झूम- झूम इठलाती गाती (कोरस)
बरखा रानी आई रे रानी बरखा आई रे 
बरखा रानी आई रे रानी बरखा आई रे 

काले-काले बादल देखो (पुरुष)
नया संदेशा लायो रे
नया संदेशा लायो रे

बंजर धरती पर अब बरखा (कोरस)
फसल उगाने आई रे
बरखा रानी आई रे रानी बरखा आई रे 
बरखा रानी आई रे रानी बरखा आई रे 

देख घटाएं काली-काली (स्त्री)
मनवा पीं को पुकारे रे
देख मयूर की चाल मनहरी
हमरा जियरा डोले रे

बंजर धरती पर अब बरखा (कोरस)
फसल उगाने आई रे
बरखा रानी आई रे रानी बरखा आई रे 
बरखा रानी आई रे रानी बरखा आई रे 

इस गीत से अगर आपको किसी कवि या शायर कि कुछ पंक्तियां याद आए तो हमसे बांटिए…

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